RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार: अक्टूबर बैठक पर सबकी नजर, बढ़ोतरी की आशंका
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी की घोषणा के बाद कहा कि महंगाई के रास्ते और उसकी संरचना को लेकर और स्पष्टता आने से पहले कोई नीतिगत कदम उठाना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "हम न तो डविश हैं, न ही हॉकिश। मौजूदा ग्रोथ, महंगाई और परिस्थितियों के हिसाब से यही सही नीतिगत दर है।"
क्यों नहीं बदलीं दरें?
केंद्रीय बैंक के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं — पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा, कच्चे तेल के बढ़ते दाम, कमजोर रुपया और अनियमित मानसून। इन सबके बीच RBI ने इंतजार करने की रणनीति अपनाई है। 2025 में केंद्रीय बैंक ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिसमें दिसंबर में आखिरी 25 bps की कटौती के बाद दर 5.25% पर आई थी। 2026 में अब तक दरें स्थिर बनी हुई हैं।
- रेपो रेट: 5.25%
- रिवर्स रेपो रेट: 3.35%
- बैंक रेट: 5.50%
- MSF रेट: 5.50%
- नीतिगत रुख: न्यूट्रल
अक्टूबर में बढ़ोतरी की आशंका क्यों?
अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 को होगी और 7 अक्टूबर को फैसला आएगा। वैश्विक रेटिंग एजेंसियों को इस बार बढ़ोतरी की उम्मीद है:
- S&P ग्लोबल को उम्मीद है कि RBI इस वित्त वर्ष में 25 bps बढ़ाकर दर 5.5% कर सकता है। एजेंसी ने भारत की FY27 GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 7% किया है।
- फिच रेटिंग्स का अनुमान और सख्त है — अक्टूबर में 25 bps बढ़ोतरी के बाद 2027 की शुरुआत में दर 5.75% तक पहुंच सकती है।
- SBI रिसर्च ने भी अक्टूबर और दिसंबर में दो बार 25-25 bps बढ़ोतरी की सिफारिश की है।
फिच के मुताबिक खुदरा महंगाई दिसंबर में बढ़कर 5.5% हो सकती है, जबकि अगस्त में यह 4.82% थी।
आम आदमी पर क्या असर?
रेपो रेट वही दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब यह दर स्थिर रहती है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तुरंत कोई बदलाव नहीं होता। अगर अक्टूबर में दरें बढ़ती हैं, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा होगा और इसका बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों की EMI पर आ सकता है। वहीं FD पर मिलने वाला ब्याज बढ़ सकता है, जो बचतकर्ताओं के लिए अच्छी खबर होगी।