मंगलवार, 29 सितंबर 2026 निवेश की हर खबर, सरल हिंदी में
RBI

RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार: अक्टूबर बैठक पर सबकी नजर, बढ़ोतरी की आशंका

29 सितंबर 2026  •  निवेशखबर डेस्क
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त की बैठक में प्रमुख नीतिगत दर — रेपो रेट — को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया। यह लगातार चौथी बैठक है जिसमें दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। समिति ने "न्यूट्रल" रुख भी बरकरार रखा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी की घोषणा के बाद कहा कि महंगाई के रास्ते और उसकी संरचना को लेकर और स्पष्टता आने से पहले कोई नीतिगत कदम उठाना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा, "हम न तो डविश हैं, न ही हॉकिश। मौजूदा ग्रोथ, महंगाई और परिस्थितियों के हिसाब से यही सही नीतिगत दर है।"

क्यों नहीं बदलीं दरें?

केंद्रीय बैंक के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं — पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा, कच्चे तेल के बढ़ते दाम, कमजोर रुपया और अनियमित मानसून। इन सबके बीच RBI ने इंतजार करने की रणनीति अपनाई है। 2025 में केंद्रीय बैंक ने कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी, जिसमें दिसंबर में आखिरी 25 bps की कटौती के बाद दर 5.25% पर आई थी। 2026 में अब तक दरें स्थिर बनी हुई हैं।

वर्तमान नीतिगत दरें:

अक्टूबर में बढ़ोतरी की आशंका क्यों?

अगली MPC बैठक 5 से 7 अक्टूबर 2026 को होगी और 7 अक्टूबर को फैसला आएगा। वैश्विक रेटिंग एजेंसियों को इस बार बढ़ोतरी की उम्मीद है:

फिच के मुताबिक खुदरा महंगाई दिसंबर में बढ़कर 5.5% हो सकती है, जबकि अगस्त में यह 4.82% थी।

आम आदमी पर क्या असर?

रेपो रेट वही दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब यह दर स्थिर रहती है, तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में तुरंत कोई बदलाव नहीं होता। अगर अक्टूबर में दरें बढ़ती हैं, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा होगा और इसका बोझ धीरे-धीरे ग्राहकों की EMI पर आ सकता है। वहीं FD पर मिलने वाला ब्याज बढ़ सकता है, जो बचतकर्ताओं के लिए अच्छी खबर होगी।

स्रोत:
डिस्क्लेमर: यह समाचार है, वित्तीय सलाह नहीं। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।