सेंसेक्स 243 अंक टूटा, निफ्टी 22,716 पर बंद: कच्चे तेल और FII बिकवाली से लगातार दूसरे दिन गिरावट
कारोबार के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय सेंसेक्स 707 अंक तक टूटकर 72,064 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन निचले स्तरों से हुई खरीदारी ने नुकसान कुछ कम किया। सोमवार को भी बाजार में भारी गिरावट आई थी — सेंसेक्स 1,124 अंक टूटकर 72,771.72 पर बंद हुआ था, जो 30 मार्च 2026 के बाद का सबसे निचला बंद स्तर था। निफ्टी भी सोमवार को 360 अंक गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ था, जो करीब छह महीने का निचला स्तर है।
गिरावट की वजह क्या रही?
बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल के बढ़ते दाम रहे। ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर गतिरोध बना हुआ है, जिससे पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधित होने का डर गहराया है।
दूसरी बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की बिकवाली रही। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने सोमवार को ₹5,353.22 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹5,189.02 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा दिया।
इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, कमजोर एशियाई बाजार और वैश्विक अनिश्चितता ने भी निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर किया।
किन सेक्टरों पर पड़ा असर?
सेक्टोरल मोर्चे पर मेटल, फार्मा और हेल्थकेयर में हल्की बढ़त दर्ज हुई, जबकि बाकी सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। निफ्टी IT सबसे ज्यादा 1.56% टूटा, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 2.14% की गिरावट आई। रियल्टी, ऑटो और FMCG भी प्रमुख पिछड़ने वालों में रहे।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में टाइटन, HCL टेक, TCS, अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा टूटे। वहीं अदाणी पोर्ट्स, सन फार्मा, टाटा स्टील और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त के साथ बंद हुए।
- सेंसेक्स: 72,529.07 (▼242.65 अंक, -0.33%)
- निफ्टी 50: 22,716.20 (▼64.05 अंक, -0.28%)
- रुपया: 96.03 प्रति डॉलर (28 पैसे की गिरावट)
- ब्रेंट क्रूड: करीब 105 डॉलर प्रति बैरल
अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत भी
बाजार की गिरावट के बीच अर्थव्यवस्था से एक अच्छी खबर भी आई। अगस्त में भारत का औद्योगिक उत्पादन 8% बढ़ा, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 9% और बिजली व गैस आपूर्ति क्षेत्र 12.3% बढ़ा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है, और वैश्विक संकेत ही आगे बाजार की दिशा तय करेंगे।