UPI पर 15 अक्टूबर से बड़ा बदलाव: ₹2,000 से ऊपर पेमेंट पर 0.4% MDR, ग्राहकों पर कोई असर नहीं
ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
कुछ नहीं। NPCI ने साफ किया है कि आम ग्राहक किसी भी रकम का UPI पेमेंट बिना किसी शुल्क के करते रहेंगे। व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर — जैसे परिवार को पैसे भेजना या दोस्तों से बिल बांटना — रकम चाहे कितनी भी हो, पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। UPI ऑटोपे और नियमित बिल भुगतान (बिजली बिल, OTT सब्सक्रिप्शन) पर भी यह शुल्क लागू नहीं होगा।
- ₹2,000 से ऊपर के P2M लेनदेन पर 0.4% MDR (दुकानदार देंगे)
- ₹2,000 तक के सभी पेमेंट पूरी तरह मुफ्त
- P2P ट्रांसफर किसी भी रकम पर मुफ्त
- छोटे दुकानदार (महीने में ₹1 लाख तक QR से लेने वाले) छूट श्रेणी में — कोई शुल्क नहीं
- रेलवे, टेलीकॉम, ईंधन, बीमा जैसी जरूरी सेवाओं पर ₹2,000 से ऊपर ₹5 फ्लैट शुल्क
- NPCI के मुताबिक 96% मर्चेंट पेमेंट पर कोई असर नहीं पड़ेगा
क्यों लाया गया यह बदलाव?
NPCI के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में UPI ने 24.51 अरब लेनदेन किए जिनकी कुल कीमत ₹29.82 लाख करोड़ रही — यह अब तक का सबसे ज्यादा मासिक वॉल्यूम है। जुलाई के मुकाबले लेनदेन 3.6% बढ़े। नेटवर्क पर अब 752 बैंक लाइव हैं। इतने बड़े पैमाने के सिस्टम को सुरक्षित और आधुनिक बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश जरूरी है, और इसी के लिए बड़े मर्चेंट पेमेंट पर शुल्क का रास्ता अपनाया गया है।
गौरतलब है कि अगस्त में औसत UPI लेनदेन करीब ₹1,217 का रहा — यानी ज्यादातर रोजमर्रा के पेमेंट ₹2,000 की सीमा से नीचे ही हैं और उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
छोटे दुकानदारों की चिंता दूर
सबसे ज्यादा सवाल छोटे दुकानदारों को लेकर थे। NPCI ने स्पष्ट किया कि जो छोटे व्यापारी QR कोड से महीने में ₹1 लाख तक प्राप्त करते हैं, वे P2PM छूट श्रेणी में रहेंगे और उन पर कोई MDR नहीं लगेगा। उन्हें QR कोड या साउंडबॉक्स बदलने की भी जरूरत नहीं है। अगर कोई व्यापारी लगातार तीन महीने ₹1 लाख से ज्यादा प्राप्त करता है, तभी वह सामान्य श्रेणी में आएगा।